नेपाल के मंदिरों और मदरसों से स्लीपर सेल की फंडिंग? आतंक का नया मॉड्यूल सामने आने का दावा


नेपाल के धार्मिक संस्थानों—मंदिरों, मदरसों और कुछ विदेशी फंड से संचालित केंद्रों—के माध्यम से भारत में सक्रिय स्लीपर सेल नेटवर्क को आर्थिक मदद पहुंचाए जाने का बड़ा दावा सामने आया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह फंडिंग गुप्त चैनलों के जरिए की जा रही है और इसका उपयोग भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने, नेटवर्क मजबूत करने और नए मॉड्यूल तैयार करने में किया जा रहा है।

सूत्रों का कहना है कि नेपाल में बने ऐसे विदेशी धार्मिक संस्थान वर्षों से संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी में थे, लेकिन हालिया जांच में कुछ ठोस वित्तीय लेन-देन के सुराग मिले हैं। बताया जा रहा है कि ये फंडिंग अक्सर चंदे, दान या धार्मिक आयोजनों के नाम पर इकट्ठा की जाती है और फिर सीमापार ऑपरेटिव तक पहुंचाई जाती है।

भारत-नेपाल की खुली सीमा इस नेटवर्क को और सक्रिय करने में मददगार साबित हो रही है। जांच अधिकारियों का मानना है कि आतंकी संगठन नेपाल को “सुरक्षित ट्रांजिट ज़ोन” की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, जहां से फंडिंग, भर्ती और लॉजिस्टिक सपोर्ट आसानी से संचालित किया जा रहा है।

हालांकि, आधिकारिक तौर पर दोनों देशों की सरकारों ने इस मुद्दे पर विस्तृत बयान जारी नहीं किया है, लेकिन खुफिया तंत्र लगातार इस मामले पर निगरानी बढ़ा रहा है। नेपाल प्रशासन के साथ संयुक्त ऑपरेशन और वित्तीय ट्रैकिंग की संभावनाओं पर भी चर्चा चल रही है।

फिलहाल यह दावा जांच के दायरे में है, और सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस कथित फंडिंग नेटवर्क का वास्तविक पैमाना कितना बड़ा है और भारत में इसके कितने तंत्र सक्रिय हैं।

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