देश में कफ सिरप से जुड़ी गंभीर घटनाओं और कई बच्चों की मौत के बाद केंद्र सरकार ने दवा नियमों को कड़ा करते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। अब डॉक्टर की पर्ची के बिना किसी भी दवा दुकान से कफ सिरप नहीं खरीदा जा सकेगा। स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह फैसला देशभर में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दवाइयों के गलत इस्तेमाल को रोकने के उद्देश्य से लिया है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत और विदेशों में कफ सिरप में डाईथिलीन ग्लाइकोल (DEG) और एथिलीन ग्लाइकोल जैसे घातक रसायनों की मौजूदगी के कारण कई बच्चों की जान जाने के मामले सामने आए। इस तरह के रसायन किडनी को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाते हैं और समय पर इलाज न होने पर मौत का कारण बन सकते हैं। इन घटनाओं ने सरकार को दवा निर्माण और वितरण प्रक्रिया पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया।
सरकार के अनुसार, कफ सिरप अक्सर बिना डॉक्टर की सलाह के आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं, जिसके कारण लोग उन्हें जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। कई बार माता-पिता बच्चों को सामान्य सर्दी-खांसी में भी वही सिरप दे देते हैं जो वयस्कों के लिए बने होते हैं, जिससे साइड इफेक्ट्स बढ़ने का खतरा रहता है। इसके अलावा, कुछ कफ सिरप में मौजूद तत्व नींद लाने वाले या लत लगाने वाले भी होते हैं, जिसके चलते किशोरों द्वारा इनके दुरुपयोग के मामले भी बढ़े हैं।
नए नियम के तहत:
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कफ सिरप को प्रिस्क्रिप्शन ड्रग की श्रेणी में रखा जाएगा।
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मेडिकल स्टोर्स को कफ सिरप बेचने से पहले डॉक्टर द्वारा लिखी पर्ची देखनी होगी।
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बिना पर्ची के बिक्री करने पर दवा दुकानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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दवा कंपनियों को गुणवत्ता जांच और सुरक्षा मानकों को और कड़ा करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला समय की जरूरत था, क्योंकि भारत में लोग सर्दी-खांसी को हल्के में लेकर स्वयं दवा लेने की आदत रखते हैं, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा मंडराता है। सरकार की यह पहल दवा उद्योग की जवाबदेही बढ़ाएगी और खुद-से-दवा लेने की प्रवृति को रोकने में मदद करेगी।
सरकार का यह कदम बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। आने वाले समय में उम्मीद है कि ऐसे फैसलों से दवाइयों की गुणवत्ता और निगरानी बेहतर होगी, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकेगा
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