दोनों वरिष्ठ नेताओं की यह मुलाकात बेंगलुरु में नाश्ते पर हुई, जो लगभग एक घंटे तक चली। इस बैठक ने राजनीतिक गलियारों में हलचल इसलिए बढ़ा दी, क्योंकि माना जा रहा था कि पार्टी के अंदर नेतृत्व को लेकर मतभेद उभर रहे हैं। लेकिन बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार ने इन अटकलों को बेबुनियाद बताया और साफ कहा कि उनके बीच न कोई मतभेद है और न कोई भ्रम।
सिद्धारमैया ने कहा कि सरकार स्थिर है और सभी मंत्री मिलकर विकास के एजेंडे पर काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी हाईकमान के फैसले सर्वोपरि हैं और वे हमेशा उसके निर्देशों का पालन करेंगे। इसी भावनात्मक स्वर में डीके शिवकुमार ने भी कहा कि कांग्रेस पार्टी में अनुशासन सर्वोपरि है और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर संगठन का हित आता है।
डीके शिवकुमार ने आगे कहा कि कांग्रेस की जीत प्रदेश की जनता के भरोसे और सामूहिक नेतृत्व की वजह से हुई है। इसलिए पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन या सत्ता संतुलन को लेकर चल रही चर्चाओं का कोई वास्तविक आधार नहीं है। उन्होंने यह भी दोहराया कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ उनका रिश्ता पूरी तरह मजबूत है और वे सरकार को बेहतर तरीके से चलाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।
बैठक से यह संदेश भी सामने आया कि दोनों नेताओं ने राज्य में चल रही विकास परियोजनाओं, बजट योजनाओं और आगामी राजनीतिक रणनीतियों पर भी विस्तार से चर्चा की। मीडिया के सवालों पर उन्होंने दोहराया कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार में किसी भी तरह की खींचतान या असहमति नहीं है।
इस संयुक्त बयान ने स्पष्ट कर दिया कि नेतृत्व परिवर्तन की खबरें महज राजनीतिक अटकलें हैं। दोनों नेताओं ने जोर देकर कहा कि कर्नाटक सरकार अपने कार्यकाल के वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और पार्टी का फोकस स्थिर शासन, विकास और जनकल्याण पर है।
इस तरह सिद्धारमैया और शिवकुमार की मुलाकात ने यह संदेश दिया कि कांग्रेस नेता एक सुर में काम कर रहे हैं और पार्टी के भीतर किसी भी तरह के टकराव की चर्चाएं निराधार हैं।
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