बिहार की राजनीति में सोमवार का दिन ऐतिहासिक रहा, जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेता नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। बिहार विधानसभा चुनाव में 202 सीटें हासिल कर एनडीए ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई, जिसके बाद पटना का गांधी मैदान इस ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह का साक्षी बना।
शपथ ग्रहण समारोह में राजनीतिक शिष्टाचार और शक्ति का अद्भुत मिश्रण देखने को मिला। राज्यपाल के समक्ष नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों को भी शपथ दिलवाई। खास बात यह रही कि इस बार पांच-पांच नेताओं को एक साथ मंत्री पद की शपथ दिलाई गई, जिससे मंत्रिमंडल गठन की प्रक्रिया और भी सुगम और प्रभावी दिखी।
इस समारोह का सबसे महत्वपूर्ण पहलू रहा दो उपमुख्यमंत्रियों—सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा—का फिर से उपमुख्यमंत्री पद पर आसीन होना। दोनों नेताओं को संगठनात्मक क्षमता और राजनीतिक पकड़ के लिए जाना जाता है, और उनके पुनर्नियुक्त होने से यह स्पष्ट है कि एनडीए सहयोगी दलों में एकजुटता को और मजबूत करने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है।
गांधी मैदान में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में देश की शीर्ष राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कई केंद्रीय मंत्री, एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और सभी घटक दलों के प्रमुख मंच पर उपस्थित थे। उनकी उपस्थिति से यह स्पष्ट संदेश गया कि बिहार, केंद्र सरकार की विकास योजनाओं और राजनीतिक प्राथमिकताओं में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
बिहार की जनता के सामने अब एक बार फिर विकास, सुशासन और स्थिरता की उम्मीदें जुड़े हुए हैं। नीतीश कुमार के लंबे राजनीतिक अनुभव, प्रशासनिक दक्षता और एनडीए गठबंधन की मजबूती को देखते हुए यह शपथ ग्रहण समारोह सिर्फ एक औपचारिक कार्य नहीं, बल्कि आने वाले राजनीतिक और विकासात्मक एजेंडे की दिशा तय करने वाला क्षण माना जा रहा है।
नई सरकार से उम्मीद है कि वह रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे से जुड़े बड़े मुद्दों पर निर्णायक कदम उठाएगी। बिहार का यह नया अध्याय राज्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा या नहीं, यह आगामी नीतियों और उनके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा, लेकिन फिलहाल राज्य में जश्न का माहौल है और नई सरकार से बड़ी अपेक्षाएं जुड़ी हैं।

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