भारत आज महान स्वतंत्रता सेनानी और आदिवासी समुदाय के वीर पुरुष
धरती आबा बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती मना रहा है। इस विशेष अवसर पर देशभर में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं और राष्ट्र अपने इस अनमोल सपूत को श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहा है। बिरसा मुंडा न केवल आदिवासी समाज के लिए प्रेरणास्रोत रहे, बल्कि उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ क्रांति की अलख जगाई और सामाजिक-सांस्कृतिक सुधारों का भी नेतृत्व किया।
इस पावन दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, और केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई सदस्यों ने बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें स्मरण किया। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने कहा कि बिरसा मुंडा का जीवन आदिवासी समाज के गौरव और राष्ट्र की आज़ादी की संघर्षगाथा से जुड़ा एक स्वर्णिम अध्याय है।
देश के विभिन्न राज्यों में आज जनजातीय गौरव दिवस के रूप में भी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। स्कूलों, कॉलेजों और विभिन्न संस्थाओं में बिरसा मुंडा के जीवन, उनके शौर्य और योगदान पर विशेष चर्चाएं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हो रही हैं। इस मौके पर कई राज्यों में आदिवासी समुदायों के पारंपरिक नृत्य-गीतों के आयोजन भी किए गए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि बिरसा मुंडा का संघर्ष, उनके विचार और उनका त्याग आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने आदिवासी समाज के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आज का दिन देश में आदिवासी विरासत और योगदान को सम्मानित करने का महत्वपूर्ण अवसर है।
बिरसा मुंडा ने अपने अल्प जीवन में जनजातीय समाज को एकजुट करने, उनकी भूमि और अधिकारों की रक्षा करने और ब्रिटिश दमन के खिलाफ संघर्ष करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी नेतृत्व क्षमता और देशभक्ति ने उन्हें भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का एक महान नायक बना दिया।
आज उनकी 150वीं जयंती पर देशभर से उन्हें जो श्रद्धांजलि मिल रही है, वह इस बात का प्रमाण है कि धरती आबा बिरसा मुंडा की स्मृति और प्रेरणा सदैव अमर है।
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