Bihar Election Result: ईवीएम बदलना कितना मुश्किल—समझें पूरा सिस्टम, ताकि भरोसा कायम रहे


 भारत में हर चुनाव के बाद एक बहस फिर से उभर आती है—क्या ईवीएम बदली जा सकती है? जैसे ही नतीजे आते हैं, कुछ वर्गों में ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगते हैं। लेकिन चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों, पीठासीन पदाधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों से बात करने पर पता चलता है कि ईवीएम में छेड़छाड़ या उसे बदल पाना लगभग असंभव है। इसके लिए इतने चरणों और इतनी निगरानी से गुजरना पड़ता है कि किसी एक व्यक्ति या समूह के लिए यह करना व्यावहारिक तौर पर नामुमकिन हो जाता है।

सबसे पहले समझें कि मतदान शुरू होने से पहले हर बूथ पर मॉक पोल होता है। इसमें राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मशीन का परीक्षण किया जाता है। सैकड़ों वोट डालकर यह दिखाया जाता है कि मशीन सही तरीके से काम कर रही है। मॉक पोल के आंकड़े फॉर्म-17सी में दर्ज किए जाते हैं और हर पार्टी को उसकी कॉपी दे दी जाती है। इसके बाद ही मशीन को सील किया जाता है।

मतदान के दौरान ईवीएम एक तीन-स्तरीय सुरक्षा के बीच रहती है। बूथ पर केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात रहते हैं, वहीं पीठासीन अधिकारी लगातार रजिस्टर में वोटों की गिनती नोट करते रहते हैं। कैमरों, माइक्रो ऑब्जर्वर्स और चुनाव आयोग के ऐप्स के माध्यम से भी लगातार निगरानी होती है। अगर कोई भी संदिग्ध गतिविधि होती है, तो तुरंत रिपोर्ट की जाती है।

मतदान समाप्त होने के बाद ईवीएम को सील करके स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाता है। यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हर स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा दोहरी होती है—एक बाहर केंद्रीय सुरक्षा बल की और दूसरी अंदर स्थानीय प्रशासन की। साथ ही स्ट्रॉन्ग रूम की पूरी 24×7 वीडियो रिकॉर्डिंग होती है, जिसमें सभी राजनीतिक दलों को एक्सेस दिया जाता है। पार्टी प्रतिनिधि भी वहां ड्यूटी पर रह सकते हैं।

अगर किसी को ईवीएम बदलनी हो, तो उसे बूथ स्तर की मशीन, उसकी सील, स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, फॉर्म-17सी के आंकड़े, पार्टी पर्यवेक्षकों की उपस्थिति, और मशीन की यूनिक आईडी—all को एक साथ बदलना पड़ेगा। यह प्रक्रिया इतनी जटिल और बहु-स्तरीय है कि किसी भी चरण को बिना पकड़े पार कर पाना लगभग असंभव है।

चुनाव आयोग लगातार कहता आया है कि भारतीय ईवीएम इंटरनेट से कनेक्ट नहीं होतीं, इन्हें हैक नहीं किया जा सकता और इनका कंट्रोल यूनिट-बैलेट यूनिट सिस्टम पूरी तरह ऑफलाइन डिज़ाइन पर आधारित है। दुनिया भर के कई लोकतांत्रिक देशों ने भारतीय ईवीएम मॉडल को अपनाने में रुचि दिखाई है।

इसलिए जब भी नतीजे अपेक्षा के विपरीत आते हैं, आरोप भले लगते हों, पर वास्तविकता यह है कि ईवीएम को बदलने या उससे छेड़छाड़ करने के लिए इतने असंभव प्रयासों और जोखिमों से गुजरना पड़ेगा कि यह व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता। 

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