दिल्ली हवाई अड्डे पर हाल ही में सामने आई तकनीकी खामियों ने उड़ान सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। खासतौर पर तब, जब पता चला कि एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से जुड़े सिस्टम पर यह पहली बार सवाल नहीं उठे हैं। जुलाई 2024 में अहमदाबाद एयर इंडिया विमान हादसे के बाद एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (ATC Guild) ने एक पत्र जारी किया था, जिसमें दिल्ली और मुंबई जैसे देश के प्रमुख एयरपोर्ट्स पर ऑटोमेशन सिस्टम की कार्यक्षमता में गिरावट पर गंभीर चिंता जताई गई थी।
पत्र में बताया गया था कि देश के बड़े हवाई अड्डों पर इस्तेमाल हो रही कई महत्वपूर्ण तकनीकी प्रणालियाँ अपनी पूरी क्षमता के साथ प्रदर्शन नहीं कर रही हैं। ATC गिल्ड ने चेतावनी दी थी कि यदि इन समस्याओं को तत्काल दूर नहीं किया गया, तो यह भविष्य में किसी गंभीर हादसे का कारण बन सकती हैं। अहमदाबाद में हुई घटना को इसी खतरनाक लापरवाही का नतीजा बताया गया था, जिसके बाद यह चेतावनी जारी हुई।
GPS सिग्नल और ऑटोमेशन में लगातार गड़बड़ियाँ
हाल के दिनों में दिल्ली एयरपोर्ट पर विमानों को फेक GPS अलर्ट मिलने के मामले सामने आए। GPS Spoofing जैसे तकनीकी हस्तक्षेप के कारण विमान की लोकेशन और नेविगेशन डेटा में त्रुटियाँ दर्ज की जा रही हैं। DGCA ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए पायलटों और एयरलाइंस को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
उड्डयन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ATC और ऑटोमेशन सिस्टम पूरी तरह विश्वसनीय न रहें, तो लैंडिंग और टेकऑपरेशन में थोड़ी-सी चूक भी जोखिम भरा परिणाम दे सकती है।
सवालों के घेरे में प्रबंधन
अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि जब चेतावनी पहले ही जुलाई में मिल चुकी थी, तो जरूरी सुधार क्यों नहीं किए गए? क्या सुरक्षा एजेंसियाँ और प्रबंधन इस मुद्दे पर लापरवाह रहे?
ATC गिल्ड ने कहा था कि —
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सिस्टम्स में पुराने हार्डवेयर की समस्या है
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बैकअप सिस्टम हर स्थिति में काम नहीं करता
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तकनीकी मॉनिटरिंग और मेंटेनेंस पर उतना ध्यान नहीं दिया जा रहा
इन चिंताओं के बीच, विशेषज्ञ मानते हैं कि तकनीकी अपग्रेड और सुरक्षा ऑडिट को और तेज करने की जरूरत है।
DGCA और एजेंसी जांच में जुटीं
DGCA और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) अब तकनीकी गड़बड़ी और स्पूफिंग के स्रोत की जांच कर रही हैं। शुरुआती मूल्यांकन में इसे साइबर सुरक्षा से जुड़ी संभावित चुनौती भी माना जा रहा है।
फिलहाल, यात्रियों और उड़ानों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए सभी प्रणालियों की कड़ी निगरानी की जा रही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या भविष्य में ऐसे हादसे दोबारा न हों, इसके लिए चेतावनियों का पालन अब तेज़ी और गंभीरता से होगा?
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