भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने अपनी नवीनतम एंटीमाइक्रोबियल रेसिस्टेंस (AMR) सर्विलांस रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के अस्पतालों में ओपीडी, सामान्य वार्ड और आईसीयू तक सुपरबग की नई नस्लें लगातार सामने आ रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में एंटीबायोटिक प्रतिरोध (Antibiotic Resistance) के कारण दवाओं को बेअसर करने वाले बैक्टीरिया 91% तक बढ़ गए हैं, जिससे मरीजों का इलाज गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।
सुपरबग और AMR का खतरा
सुपरबग ऐसे बैक्टीरिया होते हैं जो सामान्य एंटीबायोटिक दवाओं से ठीक नहीं होते। ICMR की रिपोर्ट में कहा गया है कि अस्पतालों में संक्रमण तेजी से फैल रहे हैं और इनका इलाज पारंपरिक एंटीबायोटिक्स से करना मुश्किल हो गया है। आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, क्योंकि उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है और उन्हें लंबे समय तक इलाज की आवश्यकता होती है।
91% वृद्धि का मतलब
रिपोर्ट में यह साफ किया गया है कि पिछले कुछ वर्षों में दवारोधी बैक्टीरिया में 91% वृद्धि दर्ज की गई है। इसका सीधा असर यह हुआ है कि कई सामान्य संक्रमण अब पहले जैसी दवाओं से ठीक नहीं हो पा रहे हैं। नतीजतन, इलाज लंबा और जटिल हो गया है, और कुछ मामलों में मरीजों के जीवन पर भी खतरा बढ़ गया है।
कारण और जोखिम
ICMR ने बताया कि इस बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं:
एंटीबायोटिक्स का अविवेकपूर्ण उपयोग और बिना डॉक्टरी सलाह लेना।
मरीजों में दवा की अधूरी खुराक या समय पर दवा न लेने की प्रवृत्ति।
अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण (Infection Control) के नियमों का ठीक से पालन न होना।
क्या किया जा सकता है?
रिपोर्ट में सुझाया गया है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए:
एंटीबायोटिक स्टूअर्डशिप प्रोग्राम को सख्ती से लागू किया जाए।
अस्पतालों में संक्रमण रोकने के सख्त उपाय अपनाए जाएं।
जनता को एंटीबायोटिक्स का सही उपयोग और समय पर दवा लेने की शिक्षा दी जाए।
निष्कर्ष:
ICMR की रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अगर एंटीबायोटिक प्रतिरोध पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया, तो सुपरबग महामारी के रूप में फैल सकता है। यह स्वास्थ्य प्रणाली और मरीजों के जीवन के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
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