आस्था का सैलाब: कानपुर में छठ पूजा धूमधाम से मनी, घाटों पर भक्तों की भीड़


कानपुर, 27 अक्टूबर। सूर्य उपासना के महापर्व छठ ने सोमवार को पूरे कानपुर को भक्ति और आस्था से सराबोर कर दिया। गंगा, पांडु, पनकी और सई नदी के घाटों पर हजारों श्रद्धालु सुबह से ही उमड़ पड़े। व्रती महिलाओं ने पारंपरिक वस्त्र धारण कर विधि-विधानपूर्वक सूर्य देव और छठी मैया को अर्घ्य अर्पित किया।
चार दिवसीय पर्व के अंतिम दिन उषा अर्घ्य के साथ व्रतियों ने उदयमान सूर्य को जल, दूध और फल अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की दीर्घायु और जीवन में ऊर्जा की कामना की।
शास्त्रीनगर की रहने वाली अंजू झा अपनी पुत्र वधू व पुत्री अपूर्वा झा के संग पनकी नहर तट पर छठ मैया की पूजा अर्चना में व्यस्त हैं। श्रीमती अंजू  के साथ उनके पति प्रोफेसर डॉ अनिल झा और पुत्र आशू झा भी हैं। अंजू बताती हैं कि छठ पर्व का उद्देश्य सूर्य देव के प्रति कृतज्ञता, आत्मशुद्धि और प्रकृति सम्मान प्रकट करना है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था, बल्कि सामाजिक एकता, स्वच्छता और संयम का भी प्रतीक माना जाता है। यही नहीं संतान के सुख समृद्धि की कामना भी इस पर्व का उद्देश्य है।
शहर के गंगाघाट, बिठूर, परमट, सरसैया, जाजमऊ, पांडु नदी घाट, अन्नपूर्णा घाट समेत प्रमुख स्थलों पर भक्तों की भीड़ उमड़ी रही। लोकगीतों, ढोल-मंजीरे की थाप और छठी मईया के गीतों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। प्रशासन ने घाटों पर सुरक्षा, प्रकाश और स्वच्छता के व्यापक इंतज़ाम किए। वहीं समाजसेवी संगठनों और स्वयंसेवकों ने सेवा शिविर लगाकर प्रसाद वितरण और श्रद्धालुओं को सहायता प्रदान की।
अपूर्वा झा बताती हैं कि शाम के अर्घ्य से लेकर सुबह की आराधना तक दीपों की जगमगाहट और भक्तिभाव से सराबोर माहौल ने कानपुर को लोकसंस्कृति और आस्था के संगम में बदल दिया।

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