रोहतक: वैश्विक मानचित्र पर चमक रहा फास्टनर उद्योग
हरियाणा का रोहतक शहर फास्टनर उद्योग के कारण आज वैश्विक मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बना चुका है। यहां के छोटे-बड़े उद्योग न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी योगदान दे रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में ‘एमएसएमई फॉर भारत’ कार्यक्रम का आयोजन महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के राधाकृष्णन सभागार में किया गया है।
एमएसएमई की चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र की चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर गहन मंथन करना है। देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले इस सेक्टर में रोजगार सृजन से लेकर निर्यात बढ़ाने तक की व्यापक संभावनाएं हैं, लेकिन इसके सामने पूंजी की कमी, तकनीक में पिछड़ापन और मार्केटिंग से जुड़ी चुनौतियां अब भी बरकरार हैं।
‘एमएसएमई से देश का विकास’—कपिल का संदेश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विशेषज्ञ कपिल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच में ‘एमएसएमई’ का विशेष स्थान है। उनका मानना है कि जब सूक्ष्म और लघु उद्योग मजबूत होंगे, तभी आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार होगा। उन्होंने कहा कि स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा देने, नवाचार को प्रोत्साहन देने और नई तकनीकों को अपनाने से देश का विकास तेज़ी से संभव होगा।
नीतिगत बदलाव और सहयोग की जरूरत
मंथन सत्र में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि एमएसएमई क्षेत्र को प्रगति की राह पर ले जाने के लिए नीतिगत बदलाव और बैंकों व सरकारी संस्थाओं से अधिक सहयोग की आवश्यकता है। वित्तीय मदद में आसानी, सरल लोन प्रक्रियाएं और डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा देना आज समय की मांग है।
स्थानीय से वैश्विक तक—एमएसएमई की भूमिका
एमएसएमई क्षेत्र न केवल देश की जीडीपी में बड़ा योगदान देता है, बल्कि ग्रामीण और शहरी दोनों ही इलाकों में रोजगार सृजन का अहम माध्यम है। ‘लोकल से वोकल’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसे अभियानों की सफलता भी इस सेक्टर पर निर्भर करती है। रोहतक का यह सम्मेलन इस बात का संकेत है कि छोटे उद्योगों को बड़ी सोच और सही दिशा देने की आवश्यकता है।
आगे का रास्ता
कार्यक्रम से निकलने वाले निष्कर्ष और सुझाव न केवल हरियाणा बल्कि पूरे देश के एमएसएमई उद्योगों के लिए मार्गदर्शक साबित हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर ठोस कदम उठाएं तो यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा स्तंभ बन सकता है।
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