जापान में बच्चों और युवाओं के स्मार्टफोन इस्तेमाल को लेकर एक बड़ा प्रस्ताव सामने आया है। स्थानीय प्रशासन और शिक्षा से जुड़े अधिकारियों ने सुझाव दिया है कि छात्रों को रोजाना अधिकतम 2 घंटे ही स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने की अनुमति होनी चाहिए। इस प्रस्ताव का मकसद बढ़ते स्क्रीन टाइम और उसके स्वास्थ्य पर असर को कम करना है। हालांकि, इस सुझाव का कई जगहों पर विरोध भी हो रहा है।
क्यों रखा गया यह प्रस्ताव?
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार लंबे समय तक स्क्रीन पर नजरें गड़ाए रखने से बच्चों की नींद, आंखों की सेहत और पढ़ाई पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। जापान के कई स्कूलों और अभिभावक संघों ने मिलकर यह सिफारिश की कि बच्चों को दिनभर में सिर्फ 120 मिनट तक ही स्मार्टफोन इस्तेमाल की अनुमति दी जाए।
विरोध के स्वर
इस प्रस्ताव का कुछ अभिभावकों और युवाओं ने विरोध किया है। उनका कहना है कि स्मार्टफोन आज सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि पढ़ाई, कम्युनिकेशन और ऑनलाइन लर्निंग का अहम हिस्सा है। ऐसे में इसका इस्तेमाल 2 घंटे तक सीमित करना व्यावहारिक नहीं होगा। कई छात्रों का तर्क है कि पढ़ाई और रिसर्च के लिए ही उन्हें रोजाना 3-4 घंटे स्मार्टफोन इस्तेमाल करना पड़ता है।
सरकार की भूमिका
जापानी सरकार ने इस मुद्दे पर फिलहाल कोई सख्त फैसला नहीं लिया है। अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ प्रस्ताव और सुझाव के स्तर पर है। अंतिम निर्णय सभी पक्षों से बातचीत और विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाएगा। सरकार इस बात पर भी ध्यान दे रही है कि कहीं यह कदम बच्चों के शैक्षणिक अवसरों और डिजिटल विकास को प्रभावित न कर दे।
विशेषज्ञों की राय
स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण जरूरी है, लेकिन इसे बेहद सख्ती से लागू करना समाधान नहीं है। उनका कहना है कि बच्चों को तकनीक से पूरी तरह दूर करना संभव नहीं, बल्कि उन्हें डिजिटल बैलेंस और जिम्मेदार इस्तेमाल सिखाना ज्यादा जरूरी है।
निष्कर्ष
जापान का यह प्रस्ताव एक बड़ी बहस की शुरुआत कर चुका है। एक ओर जहां लंबे स्क्रीन टाइम से सेहत और पढ़ाई पर असर को लेकर चिंता है, वहीं दूसरी ओर आधुनिक शिक्षा और डिजिटल संसाधनों की अनिवार्यता को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और समाज इस मसले पर मध्य मार्ग कैसे निकालते हैं।
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