IT Stocks Crashed: ट्रंप की H-1B वीज़ा पॉलिसी से आईटी सेक्टर में हाहाकार


 

बाजार खुलते ही गिरावट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार द्वारा एच-1बी वीज़ा फीस में भारी वृद्धि का ऐलान भारतीय शेयर बाजार पर साफ़ दिखाई दिया। सप्ताह की शुरुआत में ही बाजार खुलते ही आईटी सेक्टर के शेयरों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई।

TCS और Infosys पर सबसे बड़ा असर

भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनियाँ TCS और Infosys सबसे अधिक प्रभावित हुईं।

  • TCS के शेयर सुबह के कारोबार में 4% तक लुढ़क गए।

  • Infosys का स्टॉक 3.5% से अधिक टूट गया।

  • वहीं, Wipro, HCL Tech और Tech Mahindra जैसे अन्य आईटी दिग्गज भी लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों में वीज़ा पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता और डर है, जिसकी वजह से आईटी शेयरों में बिकवाली बढ़ी है।

H-1B वीज़ा का महत्व

भारतीय आईटी कंपनियों का एक बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार पर निर्भर है। लाखों भारतीय आईटी पेशेवर हर साल H-1B वीज़ा के तहत अमेरिका में काम करने जाते हैं। वीज़ा फीस में बढ़ोतरी से भारतीय कंपनियों की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे उनकी प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव पड़ेगा।

निवेशकों में चिंता

ब्रोकरेज हाउसेज़ का मानना है कि वीज़ा फीस में बढ़ोतरी से आईटी सेक्टर के खर्च बढ़ेंगे। इसके अलावा, भविष्य में ट्रंप प्रशासन द्वारा और सख़्त नीतियाँ लागू होने की आशंका से निवेशक सतर्क हैं। नतीजतन, शेयर बाजार में आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में दिखाई दे रहा है।

कंपनियों की प्रतिक्रिया

कंपनियों ने अभी इस पर आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन उद्योग जगत के विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह पॉलिसी लंबे समय तक लागू रहती है, तो भारतीय आईटी कंपनियों को अपने बिज़नेस मॉडल में बदलाव करना पड़ सकता है। साथ ही, अमेरिका में स्थानीय हायरिंग पर अधिक जोर देना होगा।

निष्कर्ष

ट्रंप की नई H-1B वीज़ा पॉलिसी ने भारतीय आईटी सेक्टर को बड़ा झटका दिया है। इसका असर न केवल शेयर बाजार पर बल्कि आने वाले महीनों में कंपनियों की कमाई पर भी पड़ सकता है। निवेशक अब सरकार और कंपनियों की अगली रणनीति पर नज़र बनाए हुए हैं।

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