GST 2.0 लागू
देश में 22 सितंबर से GST 2.0 लागू हो गया है। इस नए स्ट्रक्चर के तहत केवल दो टैक्स स्लैब—5% और 18%—बचे हैं। सरकार का दावा है कि इससे उपभोक्ताओं को बड़े पैमाने पर राहत मिलेगी और खरीदारी आसान होगी। रसोई के सामान, घरेलू उपकरण और कई इलेक्ट्रॉनिक्स पर टैक्स घटा भी दिया गया है।
मोबाइल और लैपटॉप पर निराशा
हालाँकि, उपभोक्ताओं को जिस चीज़ का सबसे ज़्यादा इंतज़ार था—मोबाइल और लैपटॉप सस्ते होने का—वह उम्मीद पूरी नहीं हुई। सरकार ने इन प्रोडक्ट्स पर टैक्स दरें जस की तस रखी हैं। यानी मोबाइल फोन और लैपटॉप पर पहले जितना जीएसटी लगता था, उतना ही अब भी लगेगा।
-
मोबाइल फोन पर 18% जीएसटी पहले की तरह जारी रहेगा।
-
लैपटॉप और कंप्यूटर पर भी 18% टैक्स में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
क्यों नहीं घटी कीमतें?
विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल और लैपटॉप पहले ही 18% टैक्स स्लैब में आते थे। नए जीएसटी ढाँचे में 28% का उच्चतम स्लैब खत्म कर दिया गया है और उसे 18% तक घटा दिया गया है। चूँकि मोबाइल और लैपटॉप पहले से ही इस दायरे में थे, इसलिए इनमें अतिरिक्त राहत संभव नहीं थी।
उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया
त्योहारी सीजन से पहले लोग उम्मीद कर रहे थे कि मोबाइल और लैपटॉप की कीमतों में कटौती होगी। सोशल मीडिया पर कई उपभोक्ताओं ने निराशा जताई है। उनका कहना है कि जब टीवी, एसी और फ्रिज जैसे बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स सस्ते हो गए, तो मोबाइल और कंप्यूटर जैसे दैनिक जरूरत के गैजेट्स पर भी राहत मिलनी चाहिए थी।
उद्योग जगत की राय
मोबाइल और लैपटॉप उद्योग से जुड़े संगठनों ने कहा है कि टैक्स कम होने पर बिक्री में तेज़ी आ सकती थी। खासकर बजट सेगमेंट में, जहाँ हर एक हज़ार रुपये की कीमत उपभोक्ता के फैसले पर असर डालती है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स पर टैक्स कटौती से बाजार में रौनक बढ़ेगी और अप्रत्यक्ष रूप से गैजेट्स की डिमांड भी प्रभावित हो सकती है।
निष्कर्ष
जीएसटी 2.0 ने भले ही टीवी, एसी, फ्रिज और वॉशिंग मशीन जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स सस्ते कर दिए हों, लेकिन मोबाइल और लैपटॉप की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यानी उपभोक्ताओं को अभी भी इन गैजेट्स के लिए पुरानी दरों पर ही जेब ढीली करनी होगी।
.jpg)
0 टिप्पणियाँ