GST 2.0 India Live: नई दरें लागू, उपभोक्ताओं को राहत या राजनीति का मुद्दा?


 

जीएसटी की नई दरें लागू

नवरात्र के शुभारंभ के साथ ही जीएसटी 2.0 लागू हो गया है। अब केवल दो टैक्स स्लैब रह गए हैं – 5% और 18%। सरकार का दावा है कि इससे कर संरचना सरल होगी और उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। नई दरों से रसोई के सामान, दवाइयाँ, कपड़े, गाड़ियाँ, मकान खरीद-बनवाना, बीमा उत्पाद और इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे टीवी व एसी तक कई उत्पाद सस्ते हो गए हैं।

किन वस्तुओं को मिली छूट

नए बदलाव में दूध के टेट्रापैक, रोटी, खाखरा, निजी स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा उत्पाद, शिक्षा से जुड़ी कुछ सेवाएँ और 33 से अधिक जीवनरक्षक दवाओं को जीएसटी से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि आम आदमी तक कर राहत पहुँचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें सख्त निगरानी कर रही हैं।

कांग्रेस का हमला – ‘डेढ़वा अवतार’

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने जीएसटी 2.0 पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा,
"यह पूरा सुधार नहीं है बल्कि डेढ़वा अवतार है। सवाल यह है कि दर कटौती का वास्तविक लाभ उपभोक्ताओं तक पहुँचेगा या नहीं। सरकार हर चीज को उत्सव बना देती है, लेकिन असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। आठ साल बाद ये सुधार लागू हुए, जो पहले ही होने चाहिए थे।"

अमित शाह का समर्थन – ‘नेक्स्ट जेन जीएसटी रिफॉर्म’

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नई दरों को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि मोदी सरकार ने नवरात्रि के शुभ अवसर पर देश की माताओं-बहनों को बड़ा उपहार दिया है। शाह के अनुसार,
"390 से अधिक वस्तुओं पर टैक्स में कमी की गई है। खाद्य सामग्री, घरेलू सामान, निर्माण सामग्री, ऑटोमोबाइल, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और बीमा जैसे क्षेत्रों में राहत से देशवासियों की बचत बढ़ेगी और खुशहाली आएगी।"

भाजपा का दावा – ‘बचत उत्सव’

भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने त्योहारों से पहले जनता को दिवाली जैसा तोहफा दिया है। उन्होंने इसे ‘बचत उत्सव’ का नाम देते हुए कहा कि जीएसटी 2.0 से रोटी, कपड़ा और मकान की कीमतें कम होंगी। इसके अलावा किसानों, महिलाओं, युवाओं और बच्चों सभी वर्गों को राहत मिलेगी।

निष्कर्ष

जीएसटी 2.0 को सरकार कर सुधार का अगला चरण मान रही है, जबकि विपक्ष इसे अधूरा कदम बता रहा है। दो स्लैब वाली यह नई प्रणाली वास्तव में उपभोक्ताओं को कितनी राहत देगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

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