भारत की आगामी जनगणना-2027 को लेकर तैयारियां तेज़ हो गई हैं। इस बीच भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त (RGI) ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि इस बार जनगणना के दौरान किसी भी प्रकार की गिनती में चूक न हो, इसके लिए सभी प्राकृतिक विशेषताओं, राजमार्गों और प्रशासनिक सीमाओं को सही तरीके से भू-स्थानिक डाटा (Geospatial Data) में अपडेट करना बेहद जरूरी है।
जनगणना-2027 क्यों है खास?
गौरतलब है कि भारत में पिछली जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी। कोविड-19 महामारी के कारण 2021 में होने वाली जनगणना टल गई। ऐसे में अब यह गणना 16 साल बाद हो रही है, जिससे इसके महत्व और भी बढ़ गया है। जनगणना-2027 देश की सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय तस्वीर पेश करेगी।
दो चरणों में होगी जनगणना
RGI के अनुसार, जनगणना-2027 दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में गृह सूचीकरण और जनगणना संचालन किया जाएगा, जबकि दूसरे चरण में विस्तृत गणना की जाएगी। खास बात यह है कि इस बार जनगणना में जातिगत गणना (Caste-based Census) को भी शामिल किया जाएगा। इससे सामाजिक संरचना की और स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी, जो नीतिगत फैसलों में अहम भूमिका निभाएगी।
भू-स्थानिक डाटा अपडेट करने पर जोर
महापंजीयक ने कहा कि जनगणना की सटीकता के लिए आवश्यक है कि मानचित्रों में सभी प्राकृतिक और प्रशासनिक सीमाओं को अद्यतन किया जाए।
नदियाँ, पहाड़, झीलें और जंगल जैसी प्राकृतिक विशेषताओं को चिन्हित करना जरूरी होगा।
नए बने राजमार्ग, एक्सप्रेसवे और पुलों को भी मानचित्रों में शामिल करना होगा।
साथ ही राज्यों की सीमाओं और जिलों के प्रशासनिक विभाजन में हुए परिवर्तनों को भी अपडेट किया जाना चाहिए।
राज्यों की भूमिका अहम
RGI ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों की सीमाओं और बुनियादी ढांचे में हुए बदलाव की जानकारी जल्द से जल्द केंद्र को भेजें। ऐसा करने से आंकड़ों की सटीकता सुनिश्चित होगी और किसी क्षेत्र की गिनती छूटने की संभावना नहीं रहेगी।
निष्कर्ष
जनगणना-2027 न सिर्फ देश की जनसंख्या गिनने की प्रक्रिया है बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक नीतियों की नींव रखने वाला सबसे बड़ा डाटाबेस भी बनेगा। भू-स्थानिक तकनीक के इस्तेमाल और जातिगत आंकड़ों के समावेश से यह जनगणना पहले की तुलना में और व्यापक और आधुनिक होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे योजनाओं की पारदर्शिता बढ़ेगी और संसाधनों का बेहतर वितरण संभव हो सकेगा।
0 टिप्पणियाँ