भारत सरकार ने अपने दो पड़ोसी देशों के नागरिकों के लिए बड़ा कदम उठाया है। गृह मंत्रालय ने घोषणा की है कि अब नेपाल और भूटान के नागरिकों को भारत आने के लिए पासपोर्ट या वीजा की जरूरत नहीं होगी। यह व्यवस्था पहले से लागू थी, लेकिन अब इसे और स्पष्ट कर दिया गया है और कुछ विशेष प्रावधान भी जोड़े गए हैं।
नेपाल और भूटान के नागरिकों को मिली छूट
गृह मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल और भूटान के नागरिक भारत में बिना वीजा-पासपोर्ट प्रवेश कर सकते हैं और यहां रह सकते हैं। इसके लिए उन्हें सिर्फ एक वैध पहचान पत्र (आईडी प्रूफ) दिखाना होगा। यह कदम दोनों देशों के साथ भारत के गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रिश्तों को मजबूत करने वाला है।
तिब्बतियों पर भी लागू होगा नियम
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रावधान उन तिब्बती शरणार्थियों पर भी लागू होगा, जो पहले से भारत में रह रहे हैं या अब भारत में प्रवेश कर रहे हैं। इन तिब्बतियों को भी भारत में प्रवेश के लिए पासपोर्ट और वीजा की अनिवार्यता से छूट दी गई है। हालांकि, उनके लिए विशेष पहचान पत्र की व्यवस्था अलग से की जाएगी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल और भूटान के साथ भारत के रिश्ते हमेशा से दोस्ताना और सहज रहे हैं। तीनों देशों के बीच लोगों का आना-जाना सांस्कृतिक, धार्मिक और पारिवारिक संबंधों के कारण लगातार होता रहा है। ऐसे में वीजा-पासपोर्ट जैसी औपचारिकताओं को अनिवार्य करना व्यवहारिक नहीं माना गया। यही वजह है कि भारत सरकार ने यह प्रावधान और स्पष्ट कर दिया है।
किन शर्तों के साथ मिलेगी छूट?
हालांकि यह छूट सामान्य परिस्थितियों में लागू होगी। गृह मंत्रालय ने कहा कि सुरक्षा कारणों से यदि किसी व्यक्ति को संदिग्ध पाया जाता है तो उससे अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। इसके अलावा, नेपाल और भूटान से आने वाले नागरिकों को भारत में रोजगार या राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए अलग से अनुमति लेनी होगी।
निष्कर्ष
भारत सरकार का यह कदम पड़ोसी देशों नेपाल और भूटान के साथ रिश्तों को और प्रगाढ़ करने वाला है। साथ ही तिब्बती शरणार्थियों के लिए भी यह एक बड़ी राहत है। हालांकि, सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों से सरकार ने कुछ शर्तें भी तय की हैं। कुल मिलाकर यह फैसला दक्षिण एशिया में भारत की ‘ओपन बॉर्डर पॉलिसी’ को और मजबूती देता है।
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