भारतीय शेयर बाजार बीते सप्ताह बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स जहां 2,200 अंक टूटा, वहीं निफ्टी भी 672 अंक लुढ़क गया। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और वैश्विक संकेतों ने बाजार की धार को कमजोर किया। अब निवेशकों की निगाह इस हफ्ते होने वाली कई अहम घटनाओं पर रहेगी, जिनसे बाजार की चाल तय होगी।
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति पर नजर
इस हफ्ते सबसे अहम इवेंट होगा रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक। बाजार के जानकार मानते हैं कि फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव की संभावना कम है, लेकिन आरबीआई का रुख आगे के लिए कैसा रहेगा, इस पर निवेशकों की पैनी नजर रहेगी। महंगाई के आंकड़े और आर्थिक वृद्धि को लेकर दिए जाने वाले संकेत शेयर बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।
विदेशी निवेशकों की रणनीति
सितंबर महीने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अब तक 17,551 करोड़ रुपये की बिकवाली की है। लगातार हो रही इस निकासी से बाजार पर दबाव बढ़ा है। यदि आने वाले दिनों में भी विदेशी निवेशकों का रुख नकारात्मक रहा तो इंडेक्स पर और दबाव देखने को मिल सकता है।
टैरिफ और वैश्विक संकेतों की चिंता
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टैरिफ को लेकर उठी चिंताओं और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है। निवेशकों को डर है कि यदि वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी के संकेत गहराते हैं, तो इसका सीधा असर भारत की ग्रोथ स्टोरी पर पड़ेगा। इसलिए इस हफ्ते बाजार की चाल काफी हद तक वैश्विक संकेतों पर निर्भर रहेगी।
जीएसटी संग्रह और त्योहारी बिक्री से उम्मीदें
अक्टूबर में आने वाला जीएसटी कलेक्शन भी निवेशकों के लिए अहम संकेत देगा। यदि जीएसटी संग्रह उम्मीद से बेहतर आता है, तो यह अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत होगा और बाजार को सहारा मिल सकता है। वहीं, त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ वाहनों और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की बिक्री पर भी बाजार की नजर रहेगी। अच्छी बिक्री से कंपनियों के शेयरों में तेजी की उम्मीद बन सकती है।
सेक्टोरल परफॉर्मेंस
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस हफ्ते बैंकिंग, ऑटो और कंज्यूमर गुड्स सेक्टर पर खास निगाह रहेगी। त्योहारी मांग और लोन की बढ़ती डिमांड से बैंकिंग व ऑटो सेक्टर में सकारात्मक मूवमेंट देखने को मिल सकता है। वहीं, आईटी सेक्टर पर वैश्विक संकेतों का दबाव बना रह सकता है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर इस हफ्ते बाजार की चाल कई कारकों पर निर्भर करेगी। आरबीआई की पॉलिसी, एफपीआई का मूड, जीएसटी कलेक्शन और त्योहारी बिक्री बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशकों को सावधानी बरतते हुए दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ ही रणनीति बनाने की सलाह दी जा रही है।
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