बिहार में विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने श्रमिकों के लिए बड़ा ऐलान किया। राज्य सरकार ने 16.5 लाख श्रमिकों के बैंक खातों में सीधा आर्थिक लाभ पहुंचाया है। साथ ही श्रमिकों की सुविधा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक नए वेब पोर्टल का शुभारंभ भी किया गया। यह पहल श्रमिकों के जीवनस्तर को सुधारने और उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
16.5 लाख श्रमिकों के खाते में राशि ट्रांसफर
सरकार की इस योजना के तहत राज्य के पंजीकृत श्रमिकों को सीधे बैंक खातों में आर्थिक सहायता दी गई। श्रमिकों के हित में की गई यह पहल न केवल उन्हें सामाजिक सुरक्षा प्रदान करेगी, बल्कि त्योहार के अवसर पर उनके परिवारों को आर्थिक राहत भी देगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि सरकार श्रमिकों की बेहतरी और उन्हें सम्मानजनक जीवन देने के लिए लगातार प्रयासरत है।
वेब पोर्टल का शुभारंभ
इस अवसर पर सीएम नीतीश कुमार ने एक नए वेब पोर्टल की भी शुरुआत की। इस पोर्टल के माध्यम से श्रमिक अब आसानी से अपनी पंजीकरण प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे और सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे। पोर्टल में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इससे योजनाओं की जानकारी तेजी से श्रमिकों तक पहुंचेगी और उन्हें अपने अधिकार प्राप्त करने में किसी प्रकार की समस्या नहीं होगी।
श्रमिकों के कल्याण को प्राथमिकता
बिहार सरकार लंबे समय से श्रमिकों और असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों के लिए विभिन्न योजनाओं को लागू कर रही है। नीतीश कुमार ने इस अवसर पर कहा कि श्रमिक राज्य की रीढ़ हैं। उनकी मेहनत और योगदान से ही बिहार प्रगति कर रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार आगे भी श्रमिकों के लिए नई योजनाएं लाती रहेगी।
विश्वकर्मा पूजा का खास अवसर
विश्वकर्मा पूजा का पर्व परंपरागत रूप से कामगारों, कारीगरों और श्रमिकों का पर्व माना जाता है। इस मौके पर राज्य सरकार द्वारा यह आर्थिक सहयोग श्रमिकों के लिए किसी उपहार से कम नहीं है। श्रमिक संगठनों ने भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि इससे बड़ी संख्या में परिवारों को राहत मिलेगी।
भविष्य की दिशा
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले समय में श्रमिकों के कल्याण के लिए और अधिक योजनाएं लाई जाएंगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए योजनाओं को ज़मीनी स्तर तक पहुंचाने की रणनीति अपनाई जाएगी, जिससे किसी भी श्रमिक को उसका हक पाने में देरी न हो।
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