टेलीग्राम की लोकप्रियता और विवाद
टेलीग्राम (Telegram) दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग एप्स में से एक है, जिसे भारत समेत कई देशों में लाखों-करोड़ों लोग इस्तेमाल करते हैं। हालांकि यह व्हाट्सएप जितना व्यापक नहीं है, लेकिन इसकी खासियतें, जैसे एंड-टू-एंड इनक्रिप्शन, बड़े ग्रुप चैट्स और तेज फाइल शेयरिंग, इसे अलग पहचान देती हैं। कंपनी का दावा है कि इसके संदेश पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी तीसरे पक्ष की पहुंच से बाहर रहते हैं।
लेकिन यही फीचर कई सरकारों को खटकता है। उनका तर्क है कि इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल विद्रोह, राजनीतिक असहमति और आपत्तिजनक कंटेंट फैलाने में होता है। इसी कारण दुनिया के कई देशों ने इस एप पर आंशिक या स्थायी प्रतिबंध लगा दिया है।
चीन (China)
2015 से चीन में टेलीग्राम पूरी तरह बैन है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और वकीलों ने सरकार विरोधी गतिविधियों के लिए इसका इस्तेमाल किया। चीनी प्रशासन ने इसे “राष्ट्रीय सुरक्षा” के लिए खतरा मानते हुए रोक लगा दी।
ईरान (Iran)
2018 में ईरान ने टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाया। यह एप यहां सबसे ज्यादा उपयोग में लाया जाने वाला प्लेटफॉर्म था। सरकार ने इसे विरोध प्रदर्शनों और अनैतिक कंटेंट फैलाने का जरिया बताते हुए ब्लॉक कर दिया। इसके बाद ईरान में स्थानीय मैसेजिंग एप्स को बढ़ावा दिया गया।
वियतनाम (Vietnam)
2025 में वियतनाम ने टेलीग्राम को अस्थायी रूप से बंद किया। प्रशासन का आरोप था कि इस प्लेटफॉर्म पर राज्य विरोधी दस्तावेज और गलत जानकारी फैलाई जा रही है। हालांकि, बाद में हालात सामान्य होने पर बैन हटा लिया गया और सेवाएं फिर से चालू कर दी गईं।
पाकिस्तान (Pakistan)
पाकिस्तान में टेलीग्राम समय-समय पर ब्लॉक होता रहा है। सरकार का कहना है कि यह एप स्थानीय कंटेंट नियमों का पालन नहीं करता और सुरक्षा के लिहाज से जोखिमपूर्ण है। कई बार इसे अस्थायी तौर पर बंद कर दिया गया, लेकिन पूरी तरह स्थायी बैन नहीं लगाया गया।
अन्य देश और विवाद
रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस, बेलारूस, क्यूबा, और कुछ खाड़ी देशों में भी समय-समय पर टेलीग्राम को आंशिक या पूर्ण रूप से बैन किया गया। सरकारों का मानना है कि इसकी मजबूत प्राइवेसी सेटिंग्स और मॉनिटरिंग की कमी के कारण यह असामाजिक तत्वों और राजनीतिक विरोधियों का टूल बन जाता है।
निष्कर्ष
टेलीग्राम खुद को प्राइवेसी-फ्रेंडली और सुरक्षित प्लेटफॉर्म बताता है, लेकिन कई सरकारों के लिए यही इसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाती है। जहां उपयोगकर्ता इसे स्वतंत्रता और सुरक्षा का प्रतीक मानते हैं, वहीं कई प्रशासन इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता के लिए चुनौती मानते हैं।
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