रविवार को होने वाले भारत-पाकिस्तान मैच पर टिकी पूरे देश की निगाहें,देखें रिपोर्ट

Team India Has Not Lost Any Match In Dubai Beaten Pakistan Two Times - Ind  Vs Pak: दुबई में अब तक अजेय है टीम इंडिया, कुल पांच मैच जीते, दो बार  पाकिस्तान

न्यूज जंगल डेस्क,कानपुरः टी-20 वर्ल्ड कप की शुरुआत हो चुकी है। करोड़ों भारतीयों के साथ दुनियाभर के क्रिकेट लवर्स को इंतजार रविवार को भारत-पाकिस्तान के बीच होने वाले महामुकाबले का है। ताजनगरी के लिए भी यह खास मौका है। आगरा के चाहर बंधु भारतीय टीम में शामिल हैं। लेग स्पिनर राहुल चाहर 15 सदस्यीय टीम में हैं तो उनके चचेरे भाई तेज गेंदबाज दीपक चाहर को रिजर्व खिलाड़ियों में रखा गया है। महामुकाबले में राहुल चाहर को खेलने का मौका मिलता है या नहीं, ताजनगरी काे इसी का इंतजार है।

टी-20 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का पहला मुकाबला रविवार को चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के साथ होगा। भारतीय टीम वनडे और टी-20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान से कभी भी नहीं हारी है। हमेशा अपराजेय रही है। आगरा के लिए यह वर्ल्ड कप इसलिए खास है कि आगरा के राहुल चाहर वर्ल्ड कप टीम में चुने गए शहर के पहले खिलाड़ी हैं। अभ्यास मैच में इंग्लैंड के खिलाफ वो महंगे साबित हुए थे, लेकिन आस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने एक विकेट लिया था। आइपीएल में मुंबई इंडियंस के लिए खेलने वाले राहुल चाहर के अब तक के खेल को देखते हुए उन्हें वर्ल्ड कप में खेलने का मौका मिल सकता है। राहुल ने एक वनडे में तीन, पांच टी-20 में सात, 42 आइपीएल मैचों में 43 विकेट लिए हैं। वहीं, भारतीय तेज गेंदबाज और आइपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स के लिए खेलने वाले दीपक चाहर को टीम के साथ रिजर्व खिलाड़ी के रूप में रखा गया है।

राहुल चाहर के पिता देशराज सिंह चाहर ने बताया कि आइपीएल मैच हो या वर्ल्ड कप मैच, पूरा परिवार एक साथ बैठकर मैच देखता है। हमारी यही ख्वाहिश रहती है कि भारत जीते। उन्होंने बताया कि राहुल से प्रतिदिन बात हो रही है। प्रतिदिन शाम को मैं राहुल और अपनी बेटी को काॅल जरूर करता हूं। अभी प्रैक्टिस चल रही है। पिच, परिस्थिति और टीम संयोजन पर निर्भर करेगा कि राहुल को 11 खिलाड़ियों में जगह मिलती है, या नहीं। मैं तो यही कहना चाहता हूं कि उसे जब भी मौका मिले, वो अच्छा प्रदर्शन करे। देश सबसे पहले है।

राहुल चाहर शुरुआत में अपने चचेरे भाई दीपक चाहर की तरह तेज गेंदबाज बनना चाहते थे। दीपक को खेलते हुए देखकर ही उन्होंने भी आठ वर्ष की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया था। उनके कोच व ताऊ लोकेंद्र सिंह चाहर ने उनकी स्पीड कम होने के चलते उन्हें स्पिनर बनाने पर ध्यान दिया। एक वर्ष में ही राहुल की गेंदबाजी में काफी सुधार देखने को मिला। दीपक के राजस्थान की रणजी टीम में चयन के बाद राहुल ने भी प्रयास तेज कर दिए। इसके बाद राहुल के परिवार ने भरतपुर में घर खरीदा और वहीं शिफ्ट हो गए। राहुल ने अपने खेल के दम पर राजस्थान की रणजी टीम में जगह बना ली और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।

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