गोल्डन जुबली पर नेशनल क्लब के सीनियर्स कानपुर में हुए इकट्ठे


स्पोर्ट्स डेस्क। केसीए से सम्बद्ध नेशनल क्रिकेट क्लब के 50 साल पूरे हो गए। अपने जमाने में कामयाबी की उड़ान भरने वाले इस क्लब के खिलाड़ी भले ही बूढ़े हो गए हों पर उनके जज्बे में कोई कमीं नहीं दिखी। देश के विभिन्न हिस्सों जा बसे क्रिकेट के ये बूढ़े शेर पुरानी यादें ताज़ा करने को कानपुर आने का लोभ नहीं छोड़ सके और अपने साधनों से अपने होम टाउन कानपुर आ पहुंचे।

शास्त्रीनगर में पूर्व क्रिकेटर पीएस नेगी के घर इकट्ठे हुए और यादें ताज़ा की। इन खिलाड़ियों ने लम्बी लम्बी लन्तरानियाँछोड़ने के साथ ही क्रिकेट से जुड़े किस्से सुनाएं। मुंबई से आये अपने समय के तेज गेंदबाजी करने वाले ओमप्रकाश शर्मा को लोग थॉमसन के नाम से जानते थे। उनकी इंस्विंग व बाउंसर तो बैट्समैनों के छक्के छुड़ा देती थी। इस क्लब के ज्यादातर खिलाड़ियों ने खेल के बूते नौकरी पा ली थी। तेज गेंदबाजी में भी गूगली मारने की अद्भुत क्षमता वाले वीरेंद्र मिश्रा इनकम टैक्स विभाग रिटायर हुए। वीरेंद्र बताते हैं बिना आवेदन के वह नौ नौकरियां पा चुके थे। एक छोड़ते दूसरी पकड़ लेते थे। इसका श्रेय क्रिकेट को देते हैं।


नेशनल क्लब के फाउंडर जेएस नेगी बताते हैं कि खेल के जुनून ने 50 साल पहले क्लब की नींव रखी गयी थी। साथी सुरेंद्र कुमार निगम ने ही नेशनल क्लब नाम रखा था। नेगी बताते हैं कि क्लब के खिलाड़ी आर पी सिंह तो एचबीटीआई निदेशक रहे थे। नेगी और राजवीर सिंह वायुसेना से रिटायर हुए। टीम के कैप्टन रहे बीएस नेगी जिन्हें लोग भुप्पी कहते हैं, ने भी कई रोचक किस्से सुनाए। रेलवे से रिटायर चन्द्रभान सिंह क्लब के रखरखाव का काम बखूबी देखते रहे तब मैटिंग पर खेल होता था। टर्फ विकेट ग्रीनपार्क में ही था।

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सीनियर्स के बाहर जाने पर क्लब चलाने की जिम्मेदारी निर्मल सिंह और पीएस नेगी पर आ गयी। नेशनल क्लब बीते 50 साल से कानपुर में क्रिकेट खेल रहा है। जेएस नेगी तो पीएस नेगी के बड़े भाई हैं पर बीएस नेगी चाचा हैं। पीएस जब बचपन में कमेंट्री करते थे तो चाचा, भैया संबोधित करते थे।

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