विनोबा भावे के सपनों का आत्मनिर्भर भारत ही देश को बना सकता है विश्वगुरु

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शीनू त्रिपाठी की रिपोर्ट भुबनेश्वर। सन्त विनोबा भावे की पुण्यतिथि पर ओडिशा की राजधानी में एक बृहद कार्यक्रम में श्र्द्धांजलि देते हुए उनके सपनों का आत्मनिर्भर भारत निर्माण का संकल्प लिया गया। इस अवसर पर उनके भूदान आंदोलन को भी याद किया गया। मुख्य अतिथि लोक सेवक मण्डल के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष दीपक मालवीय ने कहा कि भूदान के माध्यम से संत विनोबा भावे ने सामाजिक, आर्थिक समानता लाने की कोशिश की। उनकी मुहिम को देशव्यापी समर्थन मिला। दीपक मालवीय गांधी-विनोबा पीस अवार्ड से सम्मानित किए गए।

उन्होंने सात मार्च 1951 से छह मार्च 1964 तक पूरे देश की पदयात्रा कर भूदान क्षेत्र में क्रांति लाने का काम किया। दीपक मालवीय को गांधी-विनोबा पीस अवार्ड से सम्मानित किया गया। चुनाव आयोग के पूर्व सलाहकार भगवान प्रकाश ने सन्त विनोबा के जीवन के रोचक प्रसंग सुनाए तथा राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को याद किया। उनके सपनों का आत्मनिर्भर भारत ही देश को विश्वगुरु बना सकता है।


विनोबा सेवा प्रतिष्ठान एवं गनशी ग्लोबल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम के संयोजक मनोज जेना ने विनोबा जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विनोबा जी को 1958 में प्रथम रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया। जबकि भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न से 1983 में मरणोपरांत सम्मानित किया।

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जेना ने कहा कि सादा जीवन उच्च विचार और राष्ट्र निर्माण प्रति समर्पित सन्त विनोबा भावे ने जीवन के जो मानक स्थापित किये, उनका अनुसरण करके जीने से जीवन कष्टमुक्त रहता है। अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किये।

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