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आइए जानें यूपी की कुछ दिग्गज दुर्गाओं की कहानी

न्यूज जगंल डेस्क: कानपुर आज नवरात्र की नवमी तिथि है। कन्याओं का पूजन हो रहा है। जानिए यूपी की उन दुर्गाओं की कहानी…जिन्होंने अपने संघर्ष के माद्दे से सफलता का मुकाम पाया। कानपुर की मीनाक्षी ने पति के हत्यारे पुलिस वालों को जेल भिजवाया तो आगरा की हिमानी आंखों की रोशनी न होने के बावजूद करोड़पति बनीं। वाराणसी की पूनम राय 17 साल बेड पर रहने के बाद भी नहीं हारीं। पढ़िए अपने आसपास की दुर्गाओं की कहानियां।

कानपुर की मीनाक्षी…

पति की हत्या के आरोपी 6 पुलिसवालों को जेल भिजवाया

कानपुर की मीनाक्षी के साहस के सामने सरकार को भी घुटने टेकने पड़े। गोखरपुर के होटल में पुलिस कर्मियों द्वारा अपने पति मनीष गुप्ता की हत्या के बाद घर में रहने वाली एक महिला मीनाक्षी गुप्ता ने ऐसा सशक्त रूप दिखाया कि सरकार तक झुक गई। अकेले दम पर मीनाक्षी ने पुलिस, प्रशासन और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पुलिस जिस हत्या को हादसा बताने में जुटी थी, उसे मीनाक्षी ने चंद घंटों में कड़ी से कड़ी जोड़कर हत्या साबित कर दिया था। यही नहीं गोरखपुर के डीएम और एसपी ने जब दबाव बनाने की कोशिश की तो मीनाक्षी ने उन्हें भी बेनकाब कर दिया। अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए आज मीनाक्षी कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) में ओएसडी पद पर ज्वाइन कर चुकी हैं। मीनाक्षी का कहना है कि पुलिस कर्मी गिरफ्तार हुए हैं, लेकिन उसके पति को अभी इंसाफ नहीं मिला है।

आगरा की हिमानी…

दोनों आंखों में रोशनी नहीं लेकिन करोड़पति बनीं

आगरा के राजपुर चुंगी की रहने वाली हिमानी बुंदेला की दोनों आंखों में रोशनी नहीं हैं, मगर हिमानी के हौसलों ने उसे कौन बनेगा करोड़पति के मंच तक पहुंचा दिया। केंद्रीय विद्यालय में टीचर हिमानी ने केबीसी सीजन 13 में एक करोड़ रुपए जीतकर इस सीजन की पहली करोड़पति बनने का खिताब भी जीता है। हिमानी की दोनों आंखों की रोशनी 15 साल की उम्र में चली गई थी। इसके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। दृष्टिबाधित होने के बाद भी पढ़ाई जारी रखी। बीएड करने के बाद केंद्रीय विद्यालय में शिक्षिका बनीं। इतना ही नहीं कौन बनेगा करोड़पति में हॉट सीट तक पहुंची। इसके बाद उन्होंने अमिताभ बच्चन के सवालों का सही जवाब देते हुए एक करोड़ रुपए जीते। हिमानी कहती है कि जब केबीसी में गई थी मेरे पास खोने को कुछ नहीं था। बस इतना पता था कि यहां से कुछ न कुछ जीतकर या फिर कुछ सीखकर जाना है।

वाराणसी की पूनम राय…

तीसरी मंजिल से फेंका, रीढ़ की हड्‌डी टूटी, मगर पेंटिंग में उकेरा औरतों का दर्द

वाराणसी की पूनम राय ने मनाली की 3 डिग्री सेल्सियस तापमान पर लांगेस्ट पेंटिंग बनाने का खिताब जीता है। जीवन के 17 साल के दर्द को भूलकर पूनम ने महिलाओं के 648 तरह की पीड़ाओं, भावों को चित्रकारी में उतार दिया। पूनम के ससुराल वालों ने दहेज के लिए उन्हें पहले प्रताडित किया और एक दिन तीसरी मंजिल से फेंक दिया। इस दुर्घटना के बाद पूनम की रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर आया और 17 साल बेड पर पड़ी रही। खाली दिनों में टाइमपास का साधन पेंटिंग बनी। यह देख भाई ने BHU के दृश्य कला संकाय में एडमिशन दिला दिया। इसके बाद घर पर रहकर पेंटिंग करके समय बिताने लगी। 2014 में पूनम बेड और व्हीलचेयर से उठकर वाकर पर आ गई। अब पूनम बनारस के घाटों पर जाने लगी और वहीं महिलाओं के दर्द की दास्तां को पेंटिंग में रच दिया। एक औरत के जन्म से लेकर मौत तक चेहरे के भाव को पूनम ने चित्रों में जताया है।

प्रयागराज की गुरजीत…

ओलिंपिक में भारतीय टीम को सेमीफाइनल में पहुंचाया

2021 के टोक्यो ओलिंपिक में गुरजीत कौर के एक गोल से भारतीय महिला हॉकी टीम टोक्यो ओलंपिक के सेमीफाइनल तक का सफर तय कर सकी। गुरजीत के पिता सरदार सतनाम सिंह किसान हैं। उन्होंने अपनी बेटियों को बेटों की तरह पढ़ाया। कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। पिता चाहते थे कि बेटियां खेल में खूब नाम करें। गुरजीत उत्तर मध्य रेलवे (NCR) के प्रयागराज मंडल की खिलाड़ी हैं। प्रयागराज में लंबे समय से कार्यरत गुरजीत डिफेंडर की भूमिका निभाती रही हैं।

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झांसी की शैली सिंह…

तंगहाली में पलकर शैली ने रोशन किया देश का नाम

झांसी की शैली सिंह ने वर्ल्ड एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में लंबी कूद में भारत को रजत पदक जिताया। महान खिलाड़ी अंजू बाबी जॉर्ज की एकेडमी में प्रशिक्षण ले रही शैली सिंह ने 2021 में नैरोबी में आयोजित हुई विश्व एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में 6.59 मीटर की दूरी तय कर फाइनल में दूसरा स्थान जीता। सिर्फ 1 सेंटीमीटर की दूरी से शैली स्वर्ण पदक जीतने से चूक गई। शैली की मां सिलाई करके परिवार चलाती हैं। 17 साल की शैली ने गरीबी और पारिवारिक मुश्किलों को मात देकर देश का नाम रोशन किया है। शैली की मां वनीता सिंह सिंगल मदर हैं। तीन बेटियों को अकेले दम पर पाला है। बचपन में शैली के पास स्पाइक्स भी नहीं होते थे। अंजू बॉबी जॉर्ज कहती हैं कि शैली आने वाले दिनों में उनका रिकॉर्ड भी तोड़ेंगी और देश के लिए ओलिंपिक मेडल जीतेंगी।

रायबरेली की सुधा…

सिखाया बाधाओं को कैसे पार करना है..

यूपी के एक छोटे से शहर रायबरेली की सुधा सिंह की इस स्टीपलचेज रेसर ने कुछ ऐसा कर दिखाया जो भारत की लाखों करोड़ों बेटियों के लिए मिसाल है। स्टीपलचेज यानी एक ऐसी दौड़ जहां पग-पग पर बाधाएं। पानी भरा हिस्सा, फिर समतल जमीन। दौड़ के दौरान पानी में जंप, फिर संतुलन बनाकर ट्रैक पर फर्राटा। इन मुश्किलों को पार करने के बाद लक्ष्य तक पहुंचना। रायबरेली की अंतरराष्ट्रीय एथलीट सुधा सिंह ने दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत के दम पर इस खेल में न सिर्फ खुद को साबित किया बल्कि, दुनियाभर में देश का गौरव भी बढ़ाया।यही कारण रहा कि समय के साथ साथ उनकी झोली में कई खिताब आएं। रायबरेली की इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्री से रिटायर्ड सुधा के पिता हरिनारायण सिंह कहते है कि मेरी बेटी मेरे खानदान का गौरव है। उसे तो कई खिताब मिले है पर मेरे लिए सबसे बड़ा खिताब यही है कि मैं उसका पिता हूं।

मेरठ की प्रियंका …

कंडक्टर की बेटी प्रियंका बनीं अंतरराष्ट्रीय रेसवॉकर

मेरठ की ओलंपियन प्रियंका गोस्वामी ने टोक्यो ओलंपिक्स 2021 में रेसवॉकिंग में भारत का प्रतिनिधित्व कर दुनिया को चौंका दिया। 20 किमी रेस वॉक में पहली बार भारत से खिलाड़ियों ने भाग लिया। हालांकि प्रियंका विजेताओं में स्थान बनाने में नाकाम रहीं, मगर 40 से अधिक प्रतिभागियों के बीच उनका प्रदर्शन शानदार रहा। प्रियंका के पिता मदनपाल यूपी रोडवेज में बस कंडक्टर थे, कुछ समय पहले उन्हें सस्पेँड कर दिया गया है। पिता के अपमान से आहत प्रियंका कहती हैं मेरा सपना पिता का सर गर्व से ऊंचा उठाना था। बिना कुसूर के जो सजा उन्हें मिल रही है उसके खिलाफ ये मेरी लड़ाई है। प्रियंका ने पीएम से मन की बात में संवाद करते हुए कहा था कि मुझे खिलाड़ियों वाला बैग बहुत पसंद था। बचपन से वो बैग लेना चाहती थी। आर्थिक हालात खराब होने के कारण मम्मी-पापा मेरी ख्वाहिश पूरी नहीं कर सकते थे। उस बैग को पाने की चाहत ने प्रियंका को अंतराष्ट्रीय स्तर का एथलीट बनाया। जिस पर आज देश को गर्व है।

जौनपुर की बेटी शालू की कहानी…

पिता 8 वीं और मां 5 वीं पास..बेटी यूपीएससी में चयनित

जौनपुर के सुजानगंज की शालू सोनी ने यूपीएससी में 379 रैंक लाई हैं। शालू की कामयाबी पर सबसे ज्यादा उसके माता पिता खुश हैं। पिता राधेश्याम बताते हैं, ‘मैं केवल आठवीं तक पढ़ा हूं जबकि मेरी पत्नी उषा पांचवीं तक पढ़ी हैं। हमेशा से मेरा सपना रहा है कि मेरी बेटी डीएम या एसपी बने। अब उसने मेरा सपना पूरा कर दिया। राधेश्याम बताते हैं कि मैं सर्राफा के व्यापार से जुड़ा हुआ हूं। छोटा मोटा कारोबार है। बहुत आमदनी नहीं है लेकिन इससे मेरी बेटी की पढ़ाई पर कोई असर नहीं पड़ा। उसने बिना कोचिंग के ही हमारा सपना पूरा कर दिया’।

सहारनपुर की वर्णिका अंडर 19 की उपकप्तान बनीं

सहारनुपर की बेटी वर्णिका अंडर 19 टीम की उप कप्तान सहारनपुर के छोटे से कस्बे गंगोह से निकली वर्णिका ने अंडर 19 क्रिकेट में उपककप्तान का पद संभाला। गंगोह बीराखेड़ी की वर्णिका चौधरी का अंडर 19 की यूपी रणजी ट्रॉफी में सिलेक्शन हुआ है। वह टीम उप कप्तान बनाई गई है। वर्णिका पांच भाई बहनों मे सबसे छोटी है मगर खेल के लिए उसका जुनून बहुत ऊंचा है।

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