जिंदगी जीने की कला सिखाने वाले अशोक शाहू को मिला पद्मश्री

न्यूज जगंल डेस्क: कानपुर तेज रफ्तार जिंदगी के चलते अवसाद के मामले बढ़ रहे हैं। क्षमता से अधिक वर्क लोड से युवा इसकी गिरफ्त में हैं। अकेले रह रहे बुजुर्गों में भी अवसाद हर दिन बढ़ता जा रहा है। ऐसे में अवसाद दूर करके जिंदगी जीने की कला को सिखाने का कार्य अंतरराष्ट्रीय विपश्यना साधना केंद्र कर रहा है। इसकी स्थापना 2012 में अशोक शाहू द्वारा की गई। ड्योढ़ी घाट स्थित केंद्र में 47 भाषाओं में सॉफ्टवेयर के जरिए साधना कराई जाती है। कई देशों के लोग यहां साधना करने आते हैं। 10-10 दिन के अंतराल में दो कोर्स कराए जाते हैं। कोर्स के लिए ऑनलाइन बुकिंग भी होती है। यहां साधना कोर्स निशुल्क कराया जाता है।

माइग्रेन से मिला आध्यात्म
अक्सर दर्द भी मंजिल की राह दिखा जाते हैं। कुछ ऐसा ही रहा अशोक शाहू के साथ भी। उनके छोटे भाई अनूप शाहू ने बताया कि बड़े भईया अशोक कुमार साहू को माइग्रेन की शिकायत हुई थी। बहुत ज्यादा सिर में दर्द से रातभर जागते थे। दवाएं भी बेअसर होने लगी। तब किसी ने लखनऊ में विपश्यना साधना केंद्र के शिविर के बारे के बताया। शिविर में शामिल होने के बाद मिले लाभ से आध्यात्म के प्रति शुरू हुई लगन ने पद्मश्री तक का सफर तय कराया। अनूप शाहू ने बताया कि शहर में बढ़ते शोर शराबे, भागदौड़ भरी जिंदगी और तनाव को यह कोर्स दूर करता है। अब तक हजारों लोग इसका लाभ उठा चुके हैं।

36 बेड रूम वाला संयुक्त घर
अशोक साहू का संयुक्त परिवार है। वे पांच भाई हैं। सभी के बच्चों को मिलाकर कुल 36 सदस्य होते हैं। इनके पिता होरीलाल साहू कारोबारी रहे हैं। मां राम प्यारी साहू घरेलू महिला रहीं। उन्होंने बताया कि पीपीएन कॉलेज से वर्ष 1976 में एमए अर्थशास्त्र से किया। उसके बाद पिता के साथ दाल मिल और कारोबार में सक्रिय हो गए। कानपुर देहात के बारा टूल प्लाजा के पास स्टार्च की फैक्ट्री है। पिछले एक दशक से अध्यात्म को ही अपनी दुनियां बना बैठे है।

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कानपुर को मिल चुके है 6 पद्मश्री
कानपुर के हिस्से पिछले 50 वर्षों में 6 पद्मश्री पुरस्कार आये है। जिसमे सबसे पहले श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद जी को 1973 में पद्मश्री से नवाजा गया था। उसके 30 साल बाद डॉ. श्याम नारायाण पांडेय को 2004 में यह सम्मान मिला। 2010 में उद्योगपति इरशाद मिर्जा को पद्मश्री दिया गया था। हिंदी और साहित्य के लिए उत्कृष्ट कार्य पर साहित्यकार गिरिराज किशोर को 2007 में पद्मश्री मिला था। इसके बाद वर्ष 2021 में आईआईटी के प्रो. एचसी वर्मा और अशोक कुमार साहू को पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

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