कोरोना महामारी को कई साल बीत चुके हैं, लेकिन इसके लंबे समय तक रहने वाले प्रभावों (Long COVID) पर अब भी लगातार शोध जारी है। हाल के वर्षों में कुछ लोगों ने शिकायत की है कि कोरोना संक्रमण के बाद उनकी आंखों की रोशनी पहले जैसी नहीं रही या धीरे-धीरे कमजोर होने लगी है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या 2-3 साल पहले हुआ कोविड-19 संक्रमण वास्तव में आंखों की रोशनी को प्रभावित कर सकता है?

विशेषज्ञों के अनुसार, अब तक उपलब्ध वैज्ञानिक शोध यह नहीं बताते कि अधिकांश लोगों में 2-3 साल बाद होने वाली दृष्टि कमजोरी का मुख्य कारण केवल पुराना कोरोना संक्रमण होता है। हालांकि, कुछ मामलों में कोविड-19 के दौरान या उसके बाद आंखों की रक्त वाहिकाओं, रेटिना, ऑप्टिक नर्व या शरीर में होने वाली सूजन का असर देखा गया है। ऐसे मरीजों में धुंधला दिखाई देना, आंखों में दर्द, रोशनी के प्रति संवेदनशीलता या दृष्टि संबंधी अन्य समस्याएं सामने आ सकती हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की आंखों की रोशनी पिछले कुछ वर्षों में धीरे-धीरे कम हुई है, तो इसके पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। बढ़ती उम्र, लंबे समय तक मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, ड्राई आई सिंड्रोम या चश्मे का नंबर बदलना भी दृष्टि कमजोर होने के सामान्य कारण हैं। इसलिए हर मामले को केवल कोरोना से जोड़कर देखना सही नहीं होगा।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि आपको धुंधला दिखाई दे रहा है, बार-बार सिरदर्द होता है, आंखों के सामने काले धब्बे या चमक दिखाई देती है, या अचानक नजर कमजोर होने लगे, तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। समय पर जांच कराने से कई गंभीर आंखों की बीमारियों का शुरुआती चरण में ही पता लगाया जा सकता है और उनका उपचार संभव हो सकता है।

आंखों की सेहत बनाए रखने के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और स्क्रीन का सीमित उपयोग बेहद जरूरी है। स्क्रीन पर लंबे समय तक काम करने वालों को 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह दी जाती है। यानी हर 20 मिनट बाद कम से कम 20 सेकंड के लिए लगभग 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें। साथ ही विटामिन A, C, E, ओमेगा-3 फैटी एसिड और हरी पत्तेदार सब्जियों से भरपूर भोजन आंखों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है।

कुल मिलाकर, कुछ मामलों में कोविड-19 के बाद आंखों से जुड़ी समस्याएं देखी गई हैं, लेकिन 2-3 साल बाद होने वाली हर दृष्टि कमजोरी को कोरोना का परिणाम मानना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है। यदि आपकी आंखों की रोशनी लगातार कम हो रही है, तो स्वयं अनुमान लगाने की बजाय नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराना ही सबसे सुरक्षित और सही कदम है।