केरल में शिगेला संक्रमण के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य में अब तक 126 लोगों में शिगेला संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है, जबकि एक मासूम बच्चे की मौत की खबर ने लोगों के बीच दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है।
शिगेला एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से दूषित भोजन या पानी के माध्यम से फैलता है। यह बीमारी आंतों को प्रभावित करती है और गंभीर दस्त, पेट दर्द, बुखार तथा उल्टी जैसी समस्याएं पैदा कर सकती है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में इसका खतरा अधिक माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, शिगेला संक्रमण अत्यधिक संक्रामक होता है और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से भी फैल सकता है। खराब स्वच्छता, दूषित पेयजल और हाथों की सफाई में लापरवाही इसके प्रसार के प्रमुख कारण माने जाते हैं।
शिगेला संक्रमण के प्रमुख लक्षण
- बार-बार दस्त आना, कई मामलों में खून या म्यूकस के साथ
- तेज पेट दर्द और ऐंठन
- बुखार
- मतली और उल्टी
- कमजोरी और शरीर में पानी की कमी
कैसे करें बचाव?
- खाना खाने से पहले और शौचालय के बाद साबुन से हाथ अच्छी तरह धोएं।
- केवल स्वच्छ और उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पिएं।
- खुले में बिकने वाले अस्वच्छ खाद्य पदार्थों से बचें।
- फलों और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें।
- संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर विशेष सावधानी बरतें।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश मामलों में समय पर इलाज मिलने से मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं। हालांकि, गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों में डिहाइड्रेशन का खतरा अधिक होता है, इसलिए लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।
केरल में बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से स्वच्छता के नियमों का पालन करने और किसी भी संदिग्ध लक्षण के दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की है। शिगेला संक्रमण से बचाव के लिए जागरूकता और साफ-सफाई सबसे प्रभावी उपाय माने जाते हैं।
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