पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में लंबे समय तक बनी अनिश्चितता के बीच भारत के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। भारतीय LNG टैंकर 'दिशा' (Disha) करीब तीन महीने से अधिक समय तक फंसे रहने के बाद सुरक्षित रूप से गुजरात के दहेज बंदरगाह पहुंच गया। टैंकर अपने साथ 62,370 मीट्रिक टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) लेकर आया है।
माल्टा-ध्वज वाले इस LNG कैरियर का प्रबंधन शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले एक कंसोर्टियम द्वारा किया जाता है और इसे पेट्रोनेट LNG ने चार्टर किया था। यह जहाज कतर से LNG लेकर भारत के लिए रवाना हुआ था, लेकिन पश्चिम एशिया में संघर्ष और होर्मुज मार्ग पर सुरक्षा संकट के कारण इसकी यात्रा बाधित हो गई थी।
'दिशा' उन शुरुआती बड़े वाणिज्यिक जहाजों में शामिल है, जिन्होंने अमेरिका-ईरान शांति समझौते की घोषणा के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया। जहाज के सुरक्षित गुजरने से वहां फंसे अन्य भारतीय और भारत-गामी जहाजों के लिए भी उम्मीद जगी है। रिपोर्टों के अनुसार, अभी भी कई जहाज इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि 'दिशा' का भारत पहुंचना सिर्फ एक समुद्री उपलब्धि नहीं, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। भारत अपनी LNG और अन्य ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आने वाले मार्गों के जरिए पूरा करता है। ऐसे में इस मार्ग पर सामान्य गतिविधियां बहाल होना ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों दोनों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
दहेज बंदरगाह पर टैंकर के पहुंचने के साथ ही भारत को गैस आपूर्ति के मोर्चे पर राहत मिली है। वहीं, 'दिशा' की सफल यात्रा को पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और वैश्विक ऊर्जा व्यापार के धीरे-धीरे पटरी पर लौटने के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
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