हाल ही में सामने आई एक रिसर्च ने महिलाओं की सेहत को लेकर अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। अध्ययन के अनुसार, ओवेरियन कैंसर (अंडाशय कैंसर) के कुछ शुरुआती लक्षण ऐसे हो सकते हैं जिन्हें अक्सर डिप्रेशन, तनाव या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के रूप में समझ लिया जाता है। यही वजह है कि कई मामलों में बीमारी की पहचान देर से हो पाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ओवेरियन कैंसर केवल पेट दर्द, सूजन या पाचन संबंधी समस्याओं तक सीमित नहीं है। कई मरीजों में लगातार उदासी, चिंता, थकान, ऊर्जा की कमी, भूख में बदलाव और सामाजिक गतिविधियों से दूरी जैसे लक्षण भी देखे गए हैं। ये संकेत डिप्रेशन से मिलते-जुलते होने के कारण मरीज और कभी-कभी डॉक्टर भी भ्रमित हो सकते हैं।

ओवेरियन कैंसर को अक्सर “साइलेंट किलर” कहा जाता है, क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण सामान्य और अस्पष्ट होते हैं। पेट फूलना, जल्दी पेट भर जाना, बार-बार पेशाब आना, पेल्विक दर्द और लगातार थकान जैसे लक्षण कई अन्य बीमारियों से भी जुड़े हो सकते हैं। ऐसे में यदि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों के साथ ये शारीरिक लक्षण भी दिखाई दें, तो उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि किसी महिला को लंबे समय तक डिप्रेशन जैसे लक्षण महसूस हों और साथ ही पेट या पेल्विक क्षेत्र में असामान्य बदलाव दिखाई दें, तो डॉक्टर से विस्तृत जांच जरूर करानी चाहिए। समय पर पहचान होने पर ओवेरियन कैंसर के इलाज की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को अलग-अलग देखने के बजाय समग्र रूप से समझने की जरूरत है। जागरूकता और नियमित स्वास्थ्य जांच के जरिए इस गंभीर बीमारी का समय रहते पता लगाया जा सकता है, जिससे मरीजों को बेहतर उपचार और बेहतर जीवन की संभावना मिल सकती है।