अमेरिकी शेयर बाजार में आई तेज गिरावट का असर अब पूरी दुनिया के वित्तीय बाजारों पर साफ दिखाई दे रहा है। वॉल स्ट्रीट में कमजोरी, खासतौर पर टेक्नोलॉजी शेयरों में भारी बिकवाली, ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसका सीधा असर क्रिप्टोकरेंसी, कमोडिटी और एशियाई व यूरोपीय शेयर बाजारों पर भी देखने को मिला।
अमेरिकी बाजारों में नैस्डैक और एसएंडपी 500 जैसे प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई। ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता, महंगाई की चिंता और बड़ी टेक कंपनियों के कमजोर आउटलुक के चलते निवेशकों ने जोखिम भरे निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी। टेक शेयरों में बिकवाली इतनी तेज रही कि इसका झटका बाकी सेक्टर्स तक महसूस किया गया।
इस माहौल का सबसे बड़ा असर बिटकॉइन पर पड़ा। दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी में 9 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है। सिर्फ बिटकॉइन ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी में भी भारी दबाव देखने को मिला। विशेषज्ञों का कहना है कि जब अमेरिकी शेयर बाजार कमजोर होता है, तो हाई-रिस्क एसेट्स जैसे क्रिप्टोकरेंसी सबसे पहले प्रभावित होती हैं।
वॉल स्ट्रीट की गिरावट का असर वैश्विक बाजारों पर भी साफ दिखा। एशियाई बाजारों में जापान, हांगकांग और दक्षिण कोरिया के सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। वहीं, यूरोपीय बाजारों में भी शुरुआती कारोबार में दबाव बना रहा। निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते दिखाई दे रहे हैं।
कमोडिटी बाजार भी इस उथल-पुथल से अछूता नहीं रहा। सोना और चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। एक ओर सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग बनी हुई है, वहीं डॉलर में मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बदलाव के कारण कीमतों पर दबाव भी देखा गया। चांदी में भी अस्थिरता बनी रही।
कुल मिलाकर, वॉल स्ट्रीट की कमजोरी ने यह साफ कर दिया है कि अमेरिकी बाजारों की चाल का असर वैश्विक वित्तीय सिस्टम पर कितना गहरा होता है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों, फेडरल रिजर्व की नीति और बड़ी कंपनियों के नतीजों पर टिकी रहेगी। तब तक बाजारों में उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता बने रहने के आसार हैं।
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