रेयर-अर्थ संकट के बाद ई-दोपहिया बाजार में वापसी की उम्मीद, 2026-27 में बिक्री 18% तक उछल सकती है


 भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (ई-दोपहिया) बाजार को लेकर क्रिसिल (CRISIL) की ताजा रिपोर्ट में मिली-जुली तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, रेयर-अर्थ खनिजों की आपूर्ति में कमी के चलते वित्त वर्ष 2025-26 में ई-दोपहिया बिक्री की ग्रोथ 12–13% तक ही सीमित रह सकती है। हालांकि, जैसे ही सप्लाई चेन में सुधार आएगा, 2026-27 में बिक्री में 16–18% तक की तेज बढ़त देखने को मिल सकती है।

क्रिसिल का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाले मैग्नेट, मोटर और बैटरी कंपोनेंट्स के लिए रेयर-अर्थ मिनरल्स बेहद अहम हैं। इनकी उपलब्धता में रुकावट आने से मैन्युफैक्चरिंग पर असर पड़ा है, जिससे कंपनियां न तो तेजी से उत्पादन बढ़ा पा रही हैं और न ही नए मॉडल समय पर लॉन्च कर पा रही हैं। इसका सीधा असर 2025-26 में बिक्री की रफ्तार पर पड़ने की आशंका है।

हालांकि रिपोर्ट यह भी बताती है कि मांग की बुनियाद अब भी मजबूत बनी हुई है। ईंधन की बढ़ती कीमतें, शहरी इलाकों में बढ़ता ट्रैफिक और पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते उपभोक्ताओं का रुझान लगातार इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की ओर बढ़ रहा है। इसके अलावा, सरकार की नीतियां और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में हो रहा सुधार भी बाजार को सपोर्ट कर रहा है।

क्रिसिल के अनुसार, कंपनियां इस चुनौती से निपटने के लिए कीमतों में छूट, आकर्षक फाइनेंस स्कीम और सस्ते एंट्री-लेवल मॉडल पेश कर रही हैं। इससे खासतौर पर मिडिल-क्लास और डेली कम्यूटर्स के बीच ई-दोपहिया की मांग में इजाफा देखने को मिल रहा है। कई निर्माता घरेलू सप्लायर्स पर निर्भरता बढ़ाने और वैकल्पिक तकनीकों पर काम कर रहे हैं, जिससे भविष्य में रेयर-अर्थ पर निर्भरता कम की जा सके।

रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि जैसे ही वैश्विक स्तर पर रेयर-अर्थ मिनरल्स की आपूर्ति सामान्य होगी, उत्पादन लागत घटेगी और नई लॉन्चिंग तेज होंगी। इसका सीधा फायदा 2026-27 में बिक्री को मिलेगा और ई-दोपहिया सेगमेंट दोबारा तेज रफ्तार पकड़ सकता है।

कुल मिलाकर, क्रिसिल की रिपोर्ट संकेत देती है कि अल्पकाल में चुनौतियां बनी रहेंगी, लेकिन मध्यम अवधि में ई-दोपहिया बाजार की ग्रोथ स्टोरी मजबूत है। अगर सप्लाई चेन और कीमतों पर नियंत्रण बना रहता है, तो आने वाले सालों में इलेक्ट्रिक दोपहिया भारत के ऑटो सेक्टर का सबसे तेजी से बढ़ने वाला सेगमेंट बन सकता है।

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