एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और बढ़ते बाहरी दबाव के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास गति पर जोखिम बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) आने वाले महीनों में ब्याज दरों में और कटौती करने पर विचार कर सकता है।
रिपोर्ट जारी करने वाली केयरएज रेटिंग्स का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ती रही, विदेशों में ब्याज दरें ऊंची बनी रहीं या वैश्विक व्यापार और निवेश प्रवाह प्रभावित हुए, तो भारत की ग्रोथ रेट पर असर पड़ना तय है। इस स्थिति से निपटने के लिए RBI को मौद्रिक ढील (Monetary Easing) को एक विकल्प के रूप में इस्तेमाल करना पड़ सकता है।
फिलहाल आरबीआई ने हाल ही में 25 आधार अंकों (bps) की कटौती के बाद रेपो रेट को 5.25% पर रखा है। यह कदम पहले से ही अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त सहारा देने के उद्देश्य से उठाया गया था। लेकिन रिपोर्ट का कहना है कि यदि विकास दर में और कमजोरी दिखाई देती है, तो केंद्रीय बैंक आगे भी रेपो रेट में कटौती कर सकता है, जिससे उधारी सस्ती होगी, निवेश को बढ़ावा मिलेगा और मांग में सुधार संभव होगा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति मजबूत है, लेकिन वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई के जोखिम, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सुस्ती और विकसित अर्थव्यवस्थाओं की नीतिगत अनिश्चितता ऐसे कारक हैं जो घरेलू विकास पर दबाव डाल सकते हैं। ऐसे में RBI का अगला कदम काफी हद तक वैश्विक आर्थिक माहौल और भारत की तिमाही विकास दर के आंकड़ों पर निर्भर करेगा।
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