गीता को राजकीय ग्रन्थ पर चर्चा को योगी ने वार्ता बुलायी

 कानपुर: ​श्रीमद्भगवतगीता वैदिक न्यास अध्यक्ष डॉ उमेश पालीवाल ने बताया कि गीता जयंती 1 दिसंबर, सोमवार को सैकड़ों किलोमीटर की गीता संदेश मानव श्रंखला बनाई जाएगी। इस दिन मोक्षदा एकादशी का शुभ संयोग भी बन रहा है, जिससे इस पर्व का महत्व और भी बढ़ जाता है। यह दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र में अर्जुन को दिए गए श्रीमद्भगवद्गीता के उपदेश की 5162वीं जयंती होगी। डॉक्टर पालीवाल ने बताया कि इस दिन गीता सामूहिक पाठ भी होगा। उन्होंने बताया कि गीता राजकीय या राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित करने की मांग पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनवरी माह में वार्ता के लिए गीता मनीषियों को आमंत्रित किया है। इसी 23 नवम्बर को न्यास के 6 सूत्रीय मांगपत्र पत्र उन्होंने वार्ता कर विचार करने का आश्वासन दिया। ज्ञापन गीता मनीषी महामंडलेश्वर स्वामी श्रीज्ञानानन्द जी महाराज ने मुख्यमंत्री को सौंप था। इस मौके पर न्यास के पदाधिकारी भी उपस्थित थे। डॉ उमेश पालीवाल ने बताया कि अन्य मांगों में हर वर्ष मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष एकादशी के दिन को कैलेंडरों में गीता जयंती के रूप में दर्शाया जाय तथा स्कूल कालेजों विविध कार्यक्रम आयोजित किये जायें। नैतिक शिक्षा में गीता का समावेश, टेलीविज़न में गीता सम्बंधित शो आयोजित हों। 



यहां पर उल्लेखनीय है कि विश्व के 51 से अधिक देशों में भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने प्रेस वार्ता में बताया कि अबकी गीता जयंती खास इसलिए है कि इसमें सामूहिक गीता जाप, महाआरती, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ होंगी। इसका धार्मिक महत्व ​यह है कि इस दिन गीता के शाश्वत संदेशों (ज्ञानयोग, कर्मयोग और भक्तियोग) को याद करने और उन्हें जीवन में उतारने का होता है। ​भक्त इस दिन मोक्षदा एकादशी का व्रत रखते हैं और भगवान कृष्ण की विशेष पूजा करते हैं, जिसमें गीता का पाठ (विशेषकर 12वां, 15वां और 18वां अध्याय) किया जाता है।

​गीता दान और मंत्र जाप ('ऊं नमो भगवते वासुदेवाय') भी विशेष रूप से फलदायी माने जाते हैं। ​यह दिन भक्ति, ज्ञान और आत्मशुद्धि का एक अद्भुत अवसर होगा।

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