जन धन योजना की शुरुआत
प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) की शुरुआत 2014 में वित्तीय समावेशन को ध्यान में रखते हुए की गई थी। इसका उद्देश्य था – समाज के उस तबके को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना जो अब तक इससे दूर था।
11 साल का सफर
पिछले 11 वर्षों में इस योजना ने जबरदस्त सफलता हासिल की है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 55.16 करोड़ बैंक खाते जन धन योजना के तहत खोले जा चुके हैं। इनमें से अधिकांश खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों के लोगों के हैं, जहां पहले बैंकिंग सेवाएं पहुंच पाना मुश्किल था।
वित्तीय समावेशन का बड़ा कदम
जन धन योजना को भारत में फाइनेंशियल ट्रांसफॉर्मेशन का लॉन्चपैड कहा जा रहा है। इसके जरिए:
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गरीब और वंचित तबकों को बैंकिंग सुविधाएं मिलीं
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लाखों परिवारों को बीमा और पेंशन योजनाओं से जोड़ा गया
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सीधे लाभ अंतरण (DBT) का रास्ता खुला, जिससे भ्रष्टाचार पर रोक लगी
महिलाओं और ग्रामीण भारत को लाभ
जन धन खातों में सबसे ज्यादा लाभ महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को हुआ।
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महिलाओं के नाम पर बड़ी संख्या में खाते खोले गए
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ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नकदी पर निर्भरता घटी
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छोटे किसानों और मजदूरों को सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे मिला
डिजिटल पेमेंट्स को मिली रफ्तार
जन धन खातों के जरिए लोगों को रुपे डेबिट कार्ड दिए गए, जिससे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिला। यूपीआई और मोबाइल बैंकिंग की लोकप्रियता के पीछे भी इस योजना की बड़ी भूमिका रही।
वैश्विक स्तर पर सराहना
विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भी जन धन योजना की सराहना की है। इसे दुनिया की सबसे बड़ी फाइनेंशियल इन्क्लूजन स्कीम माना गया है।
निचोड़
पिछले 11 सालों में 55.16 करोड़ जन धन खाते खुलना भारत की वित्तीय प्रणाली में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह योजना न सिर्फ गरीबों को बैंकिंग से जोड़ने का जरिया बनी, बल्कि देश की आर्थिकी को न्यू इंडिया के फाइनेंशियल ट्रांसफॉर्मेशन की दिशा में आगे बढ़ाने का लॉन्चपैड साबित हुई है।
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